Saturday, March 31, 2012



ज़िंदगी ?
एक सवाल..
एक जूस्तजू..
एक शूरवात..
एक पहली साँस..
एक रिवाज़..
एक बचपन..
एक रिश्ता..अपनो से 
एक शिक्षा..
एक धेय..
एक उम्‍मीद..
एक ख़्वाब..
एक सब्र..
एक आवारगी..
एक जवानी..
एक तड़प..
एक विश्वास..
एक आहट..
एक समा..
एक बेताबी..
एक अकेलापन..
एक पागलपन..
एक संगीत..
एक साथी..
एक मोहब्बत..
एक राज़..
एक राग..
एक चाहत..
एक दौड़..
एक इज़्ज़त..
एक पैसा..
एक क़र्ज़..
एक ग़रीबी..
एक धर्म..
एक सीध..
एक बोझ..
एक ज़िम्मेदारी..
एक उलझन..
एक बंधन..
एक रुकावट..
एक झोंका..
एक आक्रोश..
एक ज़ंग..
एक जीत..
एक हार..
एक नज़रिया..
एक किताब..
एक दर्शन..
एक कविता..
एक सुकून..
एक दीक्षा..
एक फरेब..
एक ऐतबार..
एक सोच..
एक तन्हाई..
एक दर्द..
एक रोग..
एक ग़म..
एक सबक..
एक सबब..
एक जवाब ..!
या एक इंतज़ार…
खूबसूरत सी..
आखरी साँस का ?..


                                                            आपका अपना
                                                        प्रतीक
                                                                                                                        

Sunday, April 17, 2011

अस्तित्व








अस्तित्व
(मेरी अंतरंग की रचना में)


रचनात्मक अंतरंग के अस्तित्व में
अस्तित्व की खोज करता हूँ..
अस्तित्व में मैं मेरे अस्तित्व की खोज करता हूँ...


भटकते मन की चंचलता को परिसिमित कर..
द्वेषपूर्ण मौन को शिथिल करता हूँ..
अस्तित्व में मैं मेरे अस्तित्व की खोज करता हूँ...


अपरिचित भय को दुरलक्षित कर..
सवालों के आगमन को आश्वस्त करता हूँ..
अस्तित्व में मैं मेरे अस्तित्व की खोज करता हूँ...


दुर्बल विरोध का अभिसाक्षी बन..
विरोध के परिवेश में ढलता हूँ..
अस्तित्व में मैं मेरे अस्तित्व की खोज करता हूँ...


अपराजित विनय को अलंकृत कर..
अंतरंग की उपलब्धता को सुशोभित करता हूँ..
अस्तित्व में मैं मेरे अस्तित्व की खोज करता हूँ...


..प्रतीक